नारी/बालिका/स्त्री/महिला और नर/बालक/पुरूष का पारस्परिक आकर्षण स्वाभाविक है,ईडिपस तथा इलेक्ट्रा इसके प्रमाण हैं।अत:इनमें फूट डालना अनुचित है।
बुधवार, 8 मार्च 2017
हिन्दु संस्कृति में प्रचीन काल से ही नारी सम्मान की परम्परा:-
सनातन हिन्दु संस्कृति में प्रचीन काल से ही नारी सम्मान की परम्परा है।
अहिल्या द्रौपदी सीता तारा मंदोदरी तथा।
पंचकं वै स्मरै नित्यं महापतक नाशनम्।।
अहिल्या द्रौपदी सीता तारा मंदोदरी तथा।
पंचकं वै स्मरै नित्यं महापतक नाशनम्।।
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे।
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना का हमको नित बोध रहे।
सत्य सनातन धर्म ज्ञान का फैला अन्तर्बोध रहे।
सत्य सनातन धर्म ज्ञान का फैला अन्तर्बोध रहे।
हूँ मैं कौन ? कहाँ से आया ? किससे चालित होता हूँ ?
बोध हमें हो, क्यों हम जीते ? किस चिर निद्रा में सोते हैं ?
किस विकास का क्रमिक बोध ले, हम धरती पर आते हैं ?
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना हमको नित बोध रहे ।
बोध हमें हो, क्यों हम जीते ? किस चिर निद्रा में सोते हैं ?
किस विकास का क्रमिक बोध ले, हम धरती पर आते हैं ?
अन्तर्यामी ! दिव्य चेतना हमको नित बोध रहे ।
सत्य सनातन धर्म बोध का फैला अन्तर्बोध रहे।
:- प्रो०अवधेश कुमार' 'शैलज',पचम्बा,बे गूसराय।
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