अंग्रेजों ने India नाम दे, संस्कृति साहित्य बिगाड़ा है।।
आज मुक्त हम यवन वर्ग से, आजाद हिन्द यह सारा है।
भाषा, धर्म, संस्कृति विभिन्न, पर भारत राष्ट्र हमारा है।।
अखण्डित एकता हमारी, ध्वज चक्र तिरंगा प्यारा है।
केसरिया अध्यात्म शौर्य बल, सादा सुचि सत्पथ न्यारा है।।
हरी धरित्री भारत माता, नित आँचल से हमें सँवारा है।
शैलज सजग विश्व गुरु पथ पर, सुमति सुकर्म सहारा है।।
डॉ० प्रो० अवधेश कुमार "शैलज", पचम्बा, बेगूसराय।