वर्त्तमान ईसाई वर्ष २०२४ में आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि लाहिड़ी मत से बने किसी भी दृक् पंचाग यथा चिन्ता हरण जन्त्री के अनुसार मंगलवार दिनांक २४-०९-२०२४ के दोपहर १२ बजकर ३९ मिनट दिन से बुधवार दिनांक २५-०९-२०२४ के दोपहर १२ बजकर ११ मिनट दिन तक रहेगी एवं उसके बाद दिन और रात में नवमी तिथि बीतेगी। अतः इन पंचागों के अनुसार जितिया का व्रत दिनांक २४-०९-२०२४ को तथा पारण दिनांक २५-०९-२०२४ के दोपहर १२/११ बजे के बाद शास्त्र सम्मत है।
परन्तु मकरन्द सारिणी के अनुसार बने मिथिला के विद्वानों के मतानुसार बने पंचाग उदाहरणार्थ अपराजिता पंचाग के अनुसार आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि मंगलवार दिनांक २४-०९-२०२४ के सायं ६ बजकर ०६ मिनट दिन से बुधवार दिनांक २५-०९-२०२४ के सायंकाल ५ बजकर ०४ मिनट दिन तक रहेगी एवं उसके बाद दिन और रात में नवमी तिथि बीतेगी। अतः इन पंचागों के अनुसार भी जितिया का व्रत दिनांक २४-०९-२०२४ को तथा पारण दिनांक २५-०९-२०२४ के सायंकाल ५/०४ बजे के बाद शास्त्र सम्मत है।
इस प्रकार लाहिरी एवं मकरन्द दोनों मतों के अनुसार दिनांक २४-०९-२०२४ मंगलवार की रात्रि में चन्द्रोदय व्यापिनी अष्टमी तिथि बीतेगी लेकिन दिनांक २५-०९-२०२४ बुधवार के दिन रात्रि काल में चन्द्रोदय व्यापिनी नवमी तिथि बीतेगी। अतः दोनों ही मतों के अनुसार वर्त्तमान ईसाई वर्ष २०२४ में मुझ अल्पज्ञ के अनुसार स्नानादौ उदया तिथि के स्थान पर निर्णय सिन्धु के मतानुसार दिनांक २४ सितम्बर २०२४ मंगलवार के दिन जितिया व्रत तथा दिनांक २५ सितम्बर २०२४ के दिन पारण शास्त्र सम्मत माना जा सकता है।
मकरन्द ऋषि ने लिखा है कि मकरन्द सारिणी से बने पंचाग को ग्रह वेध द्वारा हर १४४ साल में शुद्ध कर पुनः इस सारिणी (मकरन्द सारिणी) के अनुसार पंचाग बनाना चाहिये।