शनिवार, 18 जुलाई 2026

स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र : व्यक्तित्व एवं कृतित्व

स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र (1918–1987) बेगूसराय के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, किसान नेता, पत्रकार तथा संसदीय लोकतंत्र के प्रारम्भिक दौर के प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधियों में गिने जाते हैं। वे बिहार के बेगूसराय ज़िले के पचम्बा (Pachamba) ग्राम के निवासी थे तथा उनके पिता का नाम स्वर्गीय सोना प्रसाद मिश्र था। �
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उनका जन्म 1918 में पचम्बा (तत्कालीन मुंगेर ज़िला) में हुआ। उन्होंने पटना के बी. एन. कॉलेज तथा पटना कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वे सक्रिय रहे और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण कारावास भी भुगता। �
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स्वतंत्रता-पूर्व एवं स्वतंत्रता के प्रारम्भिक वर्षों में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए, जिनमें प्रमुख हैं—
बिहार प्रांतीय किसान सभा के सचिव।
अखिल भारतीय फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के सचिव (1946–48)।
साप्ताहिक "आजाद हिन्द" के संपादक।
बिहार प्रांतीय कांग्रेस समिति के किसान उपसमिति के सचिव तथा प्रचार सचिव। �
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संसदीय जीवन में वे बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार निर्वाचित हुए—
प्रथम लोकसभा (1952–1957)
द्वितीय लोकसभा (1957–1962)
तृतीय लोकसभा (1962–1967)
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए और लगभग 1952 से 1967 तक लगातार बेगूसराय का प्रतिनिधित्व करते रहे। तकनीकी रूप से 1949 में वे सांसद नहीं थे; भारत की पहली लोकसभा का गठन 1952 के आम चुनावों के बाद हुआ। �
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उनके संसदीय कार्यकाल में बेगूसराय क्षेत्र में कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास, किसान हितों तथा आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विषयोंप्रतिनिधित्व को प्रमुखता मिली। किसान आंदोलनों से उनका गहरा जुड़ाव होने के कारण वे ग्रामीण समाज की समस्याओं को संसद में उठाने वाले नेताओं में माने जाते हैं। �
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1967 के आम चुनाव में वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता योगेन्द्र शर्मा से पराजित हुए, जिसके साथ उनके लगातार तीन कार्यकालों का संसदीय  समाप्त हुआ। �
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17 जुलाई 1987 को पुणे (महाराष्ट्र) में उनका निधन हुआ। आज भी उन्हें बेगूसराय के प्रारम्भिक संसदीय इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम तथा किसान राजनीति के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में स्मरण किया जाता है। �
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