शनिवार, 18 जुलाई 2026

जन-हस्ताक्षर अभियान ज्ञापन

जन-हस्ताक्षर अभियान ज्ञापन

स्वतंत्रता सेनानी, भूतपूर्व सांसद (बेगूसराय) एवं जननेता स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र को मरणोपरांत उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए जाने हेतु जन-अनुरोध

सेवा में,

माननीय राष्ट्रपति महोदया, भारत गणराज्यराष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।

माध्यम से :माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार।
माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार।
माननीय संस्कृति मंत्री, भारत सरकार।

महोदया,

हम, बिहार के बेगूसराय जनपद तथा देश के विभिन्न भागों के नागरिक, अत्यंत श्रद्धा एवं सम्मान के साथ यह जन-अनुरोध प्रस्तुत करते हैं कि स्वतंत्रता सेनानी, जननेता एवं भूतपूर्व सांसद स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान का समुचित राष्ट्रीय मूल्यांकन किया जाए तथा यदि उनका योगदान निर्धारित मानदंडों के अनुरूप पाया जाए तो उन्हें मरणोपरांत उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करने पर विचार किया जाए।

स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र का संक्षिप्त परिचय

स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र का जन्म बिहार के बेगूसराय जनपद के पचम्बा ग्राम में हुआ। वे स्वतंत्रता आंदोलन की राष्ट्रीय चेतना से प्रेरित होकर सार्वजनिक जीवन में आए तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात लोकतांत्रिक भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाई।

वे किसान आंदोलनों एवं ग्रामीण समाज के उत्थान से जुड़े रहे तथा बिहार प्रांतीय किसान सभा जैसे जनआंदोलनों में सक्रिय योगदान दिया। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सादगी, ईमानदारी, नैतिकता और राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया।

वे स्वतंत्र भारत के प्रथम संसदीय दौर के प्रमुख जनप्रतिनिधियों में रहे तथा बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। संसद में उन्होंने ग्रामीण विकास, किसानों की समस्याओं, शिक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय विकास से जुड़े विषयों को गंभीरता और गरिमा के साथ उठाया।

वे उत्कृष्ट वक्ता होने के साथ-साथ अध्ययनशील, विचारशील तथा सिद्धांतनिष्ठ जनप्रतिनिधि थे। स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शों को उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में निरंतर जीवित रखा। उनका सम्पूर्ण जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजनीति का वास्तविक उद्देश्य जनसेवा और राष्ट्रसेवा होना चाहिए।

आज, जब भारत स्वतंत्रता के अमृतकाल में अपने राष्ट्रनिर्माताओं का स्मरण कर रहा है, तब ऐसे जनप्रतिनिधियों के योगदान का सम्मान करना राष्ट्र के लोकतांत्रिक इतिहास के प्रति हमारी कृतज्ञता का प्रतीक होगा।

हमारी विनम्र प्रार्थनाएँ

हम भारत सरकार से विनम्र अनुरोध करते हैं कि—

स्वर्गीय मथुरा प्रसाद मिश्र के जीवन एवं योगदान का विशेषज्ञ समिति द्वारा सम्यक् अध्ययन एवं मूल्यांकन कराया जाए।

यदि उनका योगदान निर्धारित मानदंडों के अनुरूप पाया जाए, तो उन्हें मरणोपरांत उपयुक्त राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाए।

उनके संसदीय, स्वतंत्रता संग्राम एवं सामाजिक योगदान का आधिकारिक अभिलेखीकरण एवं डिजिटलीकरण कराया जाए।

बेगूसराय अथवा बिहार में किसी उपयुक्त सार्वजनिक संस्थान, पुस्तकालय, सभागार अथवा शोध-केंद्र का नामकरण उनके नाम पर करने पर विचार किया जाए।

उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर शोध एवं प्रकाशन को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे नई पीढ़ी उनके आदर्शों से परिचित हो सके।

यह जन-अनुरोध किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है। इसका उद्देश्य केवल राष्ट्र के एक समर्पित जनसेवक के योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करना तथा लोकतांत्रिक इतिहास के संरक्षण में अपना विनम्र योगदान देना है।

हमें विश्वास है कि भारत सरकार इस जनभावना का सम्मान करते हुए इस निवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।

सादर।

जन-समर्थन एवं हस्ताक्षर

क्रम

नाम

व्यवसाय/पद

पता

हस्ताक्षर

1









2









3









4









5









अभियान संयोजक

डॉ. प्रो. अवधेश कुमार 'शैलज'पचम्बा, बेगूसराय, बिहार

ध्येय-वाक्य :"राष्ट्रनिर्माताओं का सम्मान — राष्ट्र का सम्मान।"