मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

चिकित्सा सम्बंधित डॉ० अरूण कुमार का प्रमाण पत्र

डॉ० अरूण कुमार सिन्हा, बेगूसराय और उनके पिता डॉ० योगेन्द्र प्रसाद सिन्हा के सान्निध्य एवं निर्देशन में मैंने वर्षों होमियोपैथिक चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन किया और होमियोपैथिक चिकित्सा विधि के माध्यम से रूग्ण व्यक्ति की चिकित्सा भी किया फलस्वरूपडॉ० अरूण कुमार सिन्हा, बेगूसराय द्वारा उनके द्वारा मुझे हौमियोपैथिक चिकित्सा का अनुभव प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ जिसके आधार पर दिनांक 31/07/1997 को State Board Of Homoeopathic Medicine, Bihar के अन्तर्गत होमियोपैथिक प्रेक्टिसनर्स के रूप में सर्टिफिकेट संख्या 38430 के द्वारा मुझे Dr. Awadhesh Kumar Shailaj के नाम से सम्बोधित करते हुए प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया और उसके बाद से मैं और भी दत्तचित्त होकर कॉलेज में मनोविज्ञान के व्याख्याता साथ ही बाद में प्राचार्य के दायित्व का पालन करते हुए समय मिलने पर होमियोपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा के माध्यम से लोकसेवा का कार्य करता आ रहा हूँ।
1997 में ही मेरे एक मित्र ने अपने नारियल वृक्ष की चिकित्सा के लिए मुझसे आग्रह किया। नारियल का फल अपने विकास के प्रारम्भिक दिनों से ही गिरने लगता था जिससेे मेरे मित्र बहुत दु:खी थे। मैंने वृक्ष की जड़ में सेवाइना डालने की सलाह दी। उसके बाद से नारियल का फल स्वत: कभी नहीं गिरा।

आपका यह विवरण अत्यंत प्रेरणास्पद एवं विशिष्ट है, जो आपके बहुआयामी जीवन–प्रवृत्तियों को रेखांकित करता है। इसमें शिक्षा, चिकित्सा, सेवा और शोध का एक सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है। आपके द्वारा साझा किए गए इस अनुभव को यदि आप औपचारिक दस्तावेज़, आत्मकथा, या लेख के रूप में प्रस्तुत करना चाहें, तो नीचे उसका एक परिष्कृत और साहित्यिक हिंदी संस्करण दिया जा रहा है, जिसे आप आवश्यकतानुसार संशोधित भी कर सकते हैं:
डॉ० अवधेश कुमार 'शैलेज' द्वारा चिकित्सा एवं लोकसेवा का समर्पण
मैंने वर्षों तक डॉ० अरूण कुमार सिन्हा (बेगूसराय) तथा उनके पूज्य पिताश्री डॉ० योगेन्द्र प्रसाद सिन्हा के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में होम्योपैथिक चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन किया। अध्ययन काल में ही मैंने अनेक रूग्ण व्यक्तियों की चिकित्सा भी की, जिससे मुझे चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त हुआ। इस अनुभव के आधार पर डॉ० अरूण कुमार सिन्हा ने मुझे एक प्रमाण-पत्र प्रदान किया।
इस प्रमाण-पत्र के आधार पर मुझे दिनांक 31 जुलाई 1997 को State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar के अंतर्गत प्रमाणन संख्या 38430 द्वारा Dr. Awadhesh Kumar Shailaj के नाम से एक वैध होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
तत्पश्चात मैं पूर्ण निष्ठा के साथ महाविद्यालय में मनोविज्ञान के व्याख्याता एवं बाद में प्राचार्य के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए, समय मिलने पर होम्योपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा के माध्यम से जनसामान्य की सेवा में संलग्न रहा हूँ।
एक विशेष प्रसंग स्मरणीय है—वर्ष 1997 में मेरे एक मित्र ने अपने नारियल वृक्ष की चिकित्सा हेतु मुझसे आग्रह किया। उस वृक्ष में यह समस्या थी कि फल विकास के प्रारम्भिक चरण में ही गिरने लगते थे, जिससे वे अत्यंत चिंतित थे। मैंने वृक्ष की जड़ में सेवाइना (Sevin – एक जैविक कीटनाशक) डालने की सलाह दी। आश्चर्यजनक रूप से, इसके पश्चात नारियल के फल कभी असमय नहीं गिरे।
यह अनुभव मेरे लिए एक संकेत था कि चिकित्सा केवल मानव शरीर की ही नहीं, प्रकृति के अन्य घटकों की भी की जा सकती है—यदि दृष्टिकोण वैज्ञानिक, संवेदनशील और प्रयोगधर्मी हो।
यदि आप चाहें तो इसका अंग्रेज़ी अनुवाद, जीवनी रूपांतरण, या शैक्षणिक प्रस्तावना के रूप में भी विकास किया जा सकता है। क्या आप इसे किसी पुस्तक, रिपोर्ट, या बायो-प्रोफाइल के लिए उपयोग करना चाह रहे हैं?

हाँ

बहुत अच्छा। आप जिस रूप में इसका उपयोग करना चाहते हैं—उसके अनुसार हम इसे तीन तरह से विकसित कर सकते हैं:
(1) पुस्तक या आत्मकथा के लिए अध्याय के रूप में
शीर्षक सुझाव: “मनोविज्ञान से चिकित्सा तक : सेवा के संकल्पपथ पर”
Copy code
Markdown
डॉ० अरूण कुमार सिन्हा (बेगूसराय) एवं उनके पिताश्री डॉ० योगेन्द्र प्रसाद सिन्हा के सान्निध्य में मैंने वर्षों तक होम्योपैथिक चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन किया। इस अध्ययन का उद्देश्य मात्र ज्ञान प्राप्ति नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा करना था। अध्ययन काल में ही मैंने कई रोगियों की चिकित्सा कर व्यावहारिक अनुभव अर्जित किया।

मेरे कार्यों और अनुभवों को प्रमाणित करते हुए डॉ० अरूण कुमार सिन्हा द्वारा मुझे एक अनुभव–प्रमाण–पत्र प्रदान किया गया, जिसके आधार पर दिनांक **31 जुलाई 1997** को **बिहार राज्य होम्योपैथिक चिकित्सा परिषद** (State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar) द्वारा प्रमाणन संख्या **38430** के अंतर्गत मुझे *Dr. Awadhesh Kumar Shailaj* के नाम से होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में पंजीकृत किया गया।

इस मान्यता के बाद मेरी व्याख्याता–जीवन की व्यस्तता के बावजूद, whenever possible, मैं होम्योपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा के माध्यम से जनसामान्य की निःस्वार्थ सेवा करता रहा।

इसी काल में एक प्रसंग घटित हुआ जो मेरे लिए भी विस्मयकारी और प्रेरणादायक था। मेरे एक मित्र के *नारियल वृक्ष* पर फल समय से पहले गिरने लगते थे। उन्होंने अत्यंत आशा से मुझसे समाधान माँगा। मैंने वृक्ष की जड़ों में *सेवाइना (Sevin)* डालने की सलाह दी। परिणामस्वरूप वह समस्या सदा के लिए समाप्त हो गई।

इस घटना ने मुझे यह सिखाया कि चिकित्सा का क्षेत्र केवल मानव शरीर तक सीमित नहीं है—यह प्रकृति, पशु, वनस्पति और पर्यावरण की सेवा का माध्यम भी बन सकता है, यदि दृष्टिकोण करुणामय, विवेकशील और प्रयोगशील हो।
(2) शैक्षणिक या पेशेवर परिचय (बायो-प्रोफाइल) में उपयोग के लिए संक्षिप्त रूप
Copy code
Markdown
डॉ० अवधेश कुमार ‘शैलेज’ ने डॉ० अरूण कुमार सिन्हा (बेगूसराय) एवं डॉ० योगेन्द्र प्रसाद सिन्हा के सान्निध्य में होम्योपैथिक चिकित्सा का दीर्घकालीन अध्ययन किया तथा चिकित्सकीय अनुभव प्राप्त किया। 31 जुलाई 1997 को उन्हें State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar द्वारा प्रमाणन संख्या 38430 के अंतर्गत पंजीकृत चिकित्सक के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। वे मनोविज्ञान के आचार्य एवं प्राचार्य के रूप में कार्य करते हुए, समय मिलने पर होम्योपैथिक व बायोकेमिक चिकित्सा से लोकसेवा करते हैं। उनका कार्यक्षेत्र मानव-चिकित्सा तक सीमित न होकर वनस्पति चिकित्सा तक विस्तृत है—जिसका एक उल्लेखनीय उदाहरण नारियल वृक्ष के उपचार में सफलता है।
(3) अंग्रेज़ी संस्करण (for academic book, research portfolio or international use)
Title Suggestion: “From Psychology to Healing: My Homeopathic Journey”
Copy code
Markdown
Under the guidance and mentorship of Dr. Arun Kumar Sinha and his esteemed father Dr. Yogendra Prasad Sinha in Begusarai, I studied Homoeopathic medicine extensively for several years. During this time, I treated numerous patients and gained valuable clinical experience.

Recognizing this work, Dr. Arun Kumar Sinha awarded me a certificate of experience in Homoeopathic practice. Based on this, on July 31, 1997, I was officially registered as a Homoeopathic Practitioner under Certificate No. 38430 by the State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar, under the name *Dr. Awadhesh Kumar Shailaj*.

Since then, while fulfilling my responsibilities as a lecturer and later principal in the field of Psychology, I have continued to serve society through Homoeopathic and Biochemic remedies during available hours.

One remarkable incident occurred in 1997 when a friend requested help for his coconut tree whose fruits kept falling prematurely. I advised him to apply *Sevin* (a biological pest control compound) to the roots. The treatment worked, and the problem was resolved permanently. This event deepened my conviction that healing science can extend beyond the human body—to nature, agriculture, and ecology as well—if guided by compassion, rationality, and experimentation.
कृपया बताएं कि आप इनमें से किस प्रारूप को पसंद करते हैं (या किन्हीं दो या तीनों को), ताकि मैं इसे Word/PDF फ़ॉर्मेट में भी तैयार कर सकूँ अथवा आगामी खंडों के लिए लेखन सहयोग कर सकूँ।