इस प्रमाण-पत्र के आधार पर मुझे दिनांक 31 जुलाई 1997 को State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar के अंतर्गत प्रमाणन संख्या 38430 द्वारा Dr. Awadhesh Kumar Shailaj के नाम से एक वैध होम्योपैथिक चिकित्सक के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
तत्पश्चात मैं और भी पूर्ण निष्ठा के साथ होम्योपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा के माध्यम से जनसामान्य की सेवा में संलग्न रहा हूँ तथा कई होमियोपैथिक एवं बायोकेमिक चिकित्सा ग्रन्थों की रचना कर चुका हूँ, जिसे प्रकाशनार्थ प्रयत्नशील हूँ।
मेरी कृतियों को निकट भविष्य में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर वैधानिक मान्यता प्राप्त हो सके इसके लिए यथेष्ट एवं सहज मार्ग बताया जाय।
आपके द्वारा प्रस्तुत विवरण अत्यंत प्रशंसनीय है और आपकी सेवा भावना, होम्योपैथिक अध्ययन एवं चिकित्सा लेखन के प्रति समर्पण स्पष्ट रूप से झलकता है। आपने जो अनुभव एवं वैध मान्यता अर्जित की है, वह आपकी लेखनी को चिकित्सकीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
आपकी कृतियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैधानिक मान्यता दिलाने हेतु निम्नलिखित मार्ग सुझाए जा रहे हैं:
🔷 1. पांडुलिपियों की विधिवत तैयारी एवं प्रकाशन
अपने सभी ग्रंथों की प्रामाणिकता, शब्दावली की वैज्ञानिकता, संदर्भ, एवं नैदानिक उदाहरणों को सुव्यवस्थित करें।
प्रत्येक कृति में लेखक परिचय, आपकी वैध चिकित्सकीय मान्यता (प्रमाण संख्या 38430, 1997 से State Board द्वारा मान्यता) एवं आपका नैदानिक अनुभव अवश्य उल्लेख करें।
प्रकाशन हेतु निम्न संस्थानों/प्रकाशकों से संपर्क करें:
CCRH (Central Council for Research in Homoeopathy) – नई दिल्ली
Nehru Homoeopathic Medical College & Hospital (NHMC), Delhi
B. Jain Publishers – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होम्योपैथिक साहित्य के प्रमुख प्रकाशक
🔷 2. ISBN एवं Cataloguing
भारत सरकार के Raja Rammohun Roy National Agency for ISBN से अपने ग्रंथों के लिए ISBN (International Standard Book Number) प्राप्त करें।
लिंक: isbn.gov.in
यह ISBN आपकी कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालयों एवं शोध संस्थानों में पहचान देगा।
🔷 3. चिकित्सा परिषदों एवं अकादमिक संस्थानों में पंजीकरण
अपने कार्यों की प्रति State Board of Homoeopathic Medicine, Bihar को भेजकर अनुरोध करें कि इसे शिक्षण हेतु या संदर्भ ग्रंथ के रूप में मान्यता दी जाए।
आप अपने ग्रंथों को निम्न संस्थानों में भी समीक्षार्थ भेज सकते हैं:
National Institute of Homoeopathy (NIH), Kolkata
AYUSH मंत्रालय, भारत सरकार
🔷 4. अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मान्यता हेतु सुझाव
अपने ग्रंथों का अंग्रेज़ी अनुवाद तैयार कराएं ताकि उन्हें निम्न संस्थानों/प्रकाशकों को भेजा जा सके:
Boiron Laboratories (France)
European Committee for Homeopathy (ECH)
British Homeopathic Association (UK)
साथ ही, आप निम्न जर्नल्स में शोध लेख या सार-संश्लेषण भेज सकते हैं:
Homeopathy (Elsevier)
The American Journal of Homeopathic Medicine
Indian Journal of Research in Homeopathy
🔷 5. व्यावसायिक वेबसाइट या डिजिटल प्रोफ़ाइल बनाएं
एक व्यक्तिगत वेबसाइट बनाकर उसमें अपने कार्य, प्रमाण-पत्र, लेख, पांडुलिपियाँ, एवं सेवाएँ प्रदर्शित करें।
यह वेबसाइट आपकी पहचान को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ बनाएगी। इसमें आप eBook स्वरूप में ग्रंथों की बिक्री/वितरण भी कर सकते हैं।
🔷 6. संस्थागत सहभागिता एवं व्याख्यान
विभिन्न होम्योपैथिक सेमिनारों, वेबिनारों, कार्यशालाओं में भाग लेकर अपने ग्रंथों को प्रस्तुत करें।
आप Guest Faculty या Honorary Speaker के रूप में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं।
यदि आप चाहें तो मैं आपके ग्रंथों के पांडुलिपि स्वरूप को समीक्षा कर, प्रकाशन हेतु तैयार कर, तथा अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन शैली में अनुवाद/संवर्धन में भी आपकी सहायता कर सकता हूँ। कृपया आरंभिक पांडुलिपि साझा करें।
आपके ज्ञान और सेवा को अंतरराष्ट्रीय पटल पर पहुंचाने की दिशा में यह मार्ग निश्चित रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
सादर शुभकामनाएँ! 🙏📘🌿